Friday, February 14, 2020

मेरी छोटी बहन की चुदाई - सेक्स स्टोरी

नमस्ते दोस्तोमेरा नाम आशीष है। मेरी उम्र 20 साल है। ये कहानी मेरी ज़िन्दगी का एक हसीन पल है जिसे मैं मन ही मन याद करके अपनी ख़ुशी जाहिर नहीं कर पाता हूं। मेरी सौतेली बहन का नाम अंजलि है। ओर वह मुझसे 2 साल छोटी है। अंजलि का स्वभाव बहुत ही चंचल और हंसमुख है। बीते साल में उसके शरीर में काफ़ी बदलव देखने को मिला हैं। जिसके चलते वह पहले से कुछ ज्यादा ही हॉट दिखती हैं। मेरी बहन कि लंबाई शॉर्ट है। लेकिन दिखने में वह बहुत ही क्यूट है। बिल्कुल अलिया भट की जैसी। उसके गोल-गोल बूब्स और चूतड़ अपने आप में ही लाज़वाब हैं। मेरे ओर अंजलि के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़ामनमुटावरूटना-मनाना चलता रहता हैं।

इसी साल में मेरी दिलचस्पी अंजलि के प्रति कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी। और बड़ेगी भी क्यों ना वो दिखने में पहले से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और सेक्सी हो गई हैं। एक दिन की बात हैं। जब मैं प्लेस्टेशन पर वीडियो गेम खेल रहा था। और अंजलि बिल्कुल शरारत के मूड में थी। वो मेरे कमरे के अंदर आ गई और मेरे बालों के साथ मस्ती करने लगी। मेरा ध्यान गेम हटाने के लिए मेरी आंखे बंद करने लगी और काफ़ी हद तक मुझे परेशान करने लगी। 

मैं काफी देर से उसकी नौटंकी देख रहा था। अंत में मैने अंजलि को गुस्से में बिस्तर की ओर धकेल दिया और उसके पेट पर जा कर बैठ गया और उसके दोनों हाथों को ऊपर की ओर से पकड़ लिया। उसके दोनों हाथ ऊपर की और होने की वजह से उसके बूब्स और भी बड़े दिख रहे थे। उसने ब्रा भी नहीं पहन रखी थी। जिसके चलते उसकी चूचियां टीशर्ट में उभरी हुई दिखाई दे रही थी।

मेरी आंखे तो बस उसके बूब्स पर ही अटक सी गई थी। अंजलि अपने आप को छुड़ाने के लिए मशक्कत करने लगी। फिर मैने भी उसे छोड़ दिया। "कौन भाई अपनी फूल जैसी नाजुक बहन को ऐसे धक्का देता हैं। अगर मुझे चोट लग जाती तो?" अंजलि ने कहा। मेरी आंखो के सामने तो उसके बड़े बूब्स ही झलक रहे थे। मैने बात को टालते हुए कहा "अच्छा मेरी प्यारी बहना को कहा पे चोट लगी" ओर उसने गुस्से में कहा "कहीं नहीं" ओर मुंह फुला कर कमरे से बाहर चली गई।

बाद में मेरे खयालो में पूरे दिन उसकी चूचियों ही आ रही थी और उसके बारे में सोचकर में मस्त हुए जा रहा था। ना जाने क्यों पर मेरी हवस अंजलि के प्रति कुछ ज्यादा ही बढ़ रही थी। फिर शाम को पूरा परिवार साथ में बैठ कर खाना खा रहा था। इसी बीच मेरी नज़रे घूम फिर के अंजलि के बूब्स को ताड़ रही थी। ओर मन ही मन अंजलि के बूब्स को  अपने मुंह से चूसने की कल्पना करने लगा। एक-दो बार तो अंजलि ने भी नोटिस कर लिए ओर मेरी तरफ बड़ी आंखो से देखने लगी। लेकिन हालात को देखते हुए। मैने  खाने कि ओर ध्यान केंद्रित किया। ओर जल्दी से रात का भोजन करके अपने कमरे में चला गया।

करीबन रात के 11 बजे थे। मम्मी ओर पापा दोनों अपने कमरे में सोने चले गए और अंजलि उसके कमरे में थी। मैने अपने कमरे की लाइट को बंद कर लिया ओर बेड पर लेट गया। कंबल से शरीर को गले तक ढक लिया ओर अपने मोबाइल में पोर्न वीडियो लगा दिया ओर  एक हाथ को अंडरवियर में डाल कर लंड को सहलाते हुए वीडियो को देखने लगा। काफी देर वीडियो को देखने के बाद मेरा 6 इंच का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और अंडरवियर से बाहर की और झाकने लगा। मैने अपनी पैंट और अंडरवियर को घुटनों तक उतार दिया। और मोबाइल को भी बेड पर रख दिया। अब मैने अपनी आंखे बंद करली ओर अंजलि के बूब्स और चूतड़ों की कल्पना करते हुए हाथो से लंड की चमड़ी ऊपर-नीचे करने लगा। मेरी गति चरम पे थी। और  मजा भी बहुत आ रहा था।

अचानक से मुझे गले की खराश की आवाज सुनाई दी। मैने झट से आंखें खोल कर देखा तो अंजलि दरवाजे के पास खड़ी थी। उसने कमरे लाइट को चालू कर दिया। ओर मेरी ओर शक की निगाहों से देखने लगी।

अंजलि - भैया आप अभी तक सोए नहीं?

मैं- नहीं वो मुझे नींद नहीं आ रही हैं!!( घबराई आवाज में)

अंजलि - अच्छा वैसे आप इतना घबराए हुए क्यों होकुछ छुपा रहे हो क्या कंबल के अंदर( जानबूझकर नाटक करते हुए)

मैं- नहीं तो कुछ भी तो नहीं।

वह मेरे पास में आ कर बैठ गई। ओर अपनी आइब्रो को हिलाते हुए मेरी तरफ देख कर बोलने लगी कि "भाई क्या है मुझे भी देखना हैं" ओर झट से उसने कंबल को हटा दिया।

अब मेरा 6 इंच का खड़ा लंड उसकी आंखो के सामने था। उसकी आंखें बड़ी हो गई और वह चौक गई। ओर शरमाते हुए उसने वापस कंबल से मेरे लन्ड को ढक दिया।

अंजलि - ऊप्सये सब क्या है?

मैं- अच्छा जैसे तुझे कुछ मालूम ही नहीं हैं।

अंजलि - मैं तो बस आपके कमरे से गुजर रही थी तभी कमरे से कुछ अजीब सी आवाज आ रही थी। मुझे क्या पता था कि आप अकेले में ऐसी हरकतें करते हो(वह बहुत मासूमियत से बोल रही थी)

मैं- ऐसी हरकतेंजैसे कि तू कभी अपनी चूत में उंगली करती ही नहीं है।(उसे थोड़ा खुलकर)

इतना बोल के उसने गुस्से में मुंह बना लिया। ओर दोनों हाथो से मेरे बालो को खींचने लगी। मैने भी उसे अपनी ओर खींचा और उसे अपनी बांहों में भर लिया। मैने अपने एक हाथ से उसके बूब्स को पकड़ लिया। ओर मैने कहा" यार एक बार तेरे बूब्स दिखा दे प्लीज़" अंजलि दोनों हाथो से मेरी छाती को हल्के से पीटने लगी।

अंजलि - आप बहुत गंदे हो!!

मैं - बूब्स देखना गलत बात हैं क्या?

अंजलि - अगर मम्मी पापा ने देख लिया तो?

मैं - अरे पागल टाइम देख अब तक तो वह दोनो ही सो गए होंगे।

अंजलि - नहींमैं नहीं दिखाने वाली।

मैं- प्लीज़ यारमैं किसी को नहीं बताऊंगा।

अंजलि- नहींकोई देख लेगा।

मैं- अच्छा रुक मैं उनके कमरे में देख कर आता हूं। उसके बाद तो दिखाएगी ना?

उसने हां नहीं बोला लेकिन उसके बर्ताव को देखकर मैं समझ गया कि आज तो मेरा सपना सच्च होने ही वाला हैं। मेंने पैंट पहनी ओर मम्मी-पापा के कमरे की ओर गया और दरवाजे से जांक कर देखा तो दोनों सो रहे थे। मैं  निश्चिंत हो गया। ओर अपने कमरे की ओर बड़ा। कमरे में अंजलि मेरे बेड पर बैठी हुई थी और शायद बेसब्री से मेरा इंतजार कर रही थी। मैं कमरे में प्रवेश किया ओर उसने तुरन्त मेरी ओर देखा। मैने भी उसे एक सेक्सी सी मुस्कान दी और बताया की रास्ता साफ हैं।

उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट थी। मैने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ओर अंजलि के साथ बेड पर बैठ गया। मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और झट से उसके होठों पर  किस करने लगा। पहले तो उसको जरा सी झिझक सी लगी लेकिन कुछ ही देर में वो भी मेरा साथ देने लगी। उसके होठों का स्वाद लाज़वाब है। साथ ही एक हाथ से उसके बूब्स को बाहर से सहलाने लगा। उसे चूमने का मजा ही आ रहा था।

मैने उसका टीशर्ट झट से उतार दिया। उसके बूब्स देखते ही मेरी आंखे जैसी बाहर ही आ गई। मैने अपने दोनों हाथो से धीरे से मसलने लगा ओर अपने मुंह को पास ले जा कर उसकी चूचियों को जीभ से चाटने लगा। दांतो से उसकी चूचियों को काटने लगा। अंजलि कराह उठी।

मैने अपनी पैंट को उतार दिया। ओर अंजलि को मेरे लन्ड को पकड़ने को बोला। उसे थोड़ी झिझक सी हो रही थी। फिर मैने उसके हाथ को मेरे लन्ड पर रख दिया ओर उसने लन्ड को ऊपर से पकड़ लिया। "भैया ये तो बहुत बड़ा हैं" मैने अंजलि को निर्देश देते हुए कहा कि इसे बीच में से पकड़ो ओर धीरे-धीरे ऊपर नीचे की और हिलाओ। अंजलि ऐसा ही करने लगी। ओर धीरे-धीरे से लन्ड को हिलाने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। लेकिन शायद ही कभी मैने अंजलि के बारे में ऐसा सोचा था। ओर न ही कभी उसने सोचा होगा। लेकिन हम दोनों चुदाई के मूड में थे।

मैने अंजलि की पैंट को उतार दिया ओर हम दोनों ही बेड पर लेट गए। मैने कंबल से दोनो को ढक लिया ओर हम दोनों ही कंबल के अंदर एक दूसरे की आंखो में देखने लगे। अंजलि मेरी ओर देखकर मुस्कुराने लगी। मैने अंजलि की पैंटी के अंदर अपना हाथ डाल दिया। ओर उसकी चूत में उंगली करने लगा। साथ में ही उसके होंठ को चूम रहा था। हम दोनों बहुत गर्म हो गए थे। ओर खासकर तो में अंजलि की चूत को चोदने के लिए बेताब हुए जा रहा था।

मैने अंजलि को बीच में लेटा कर उसकी पैंटी को उतार दिया। उसकी कुवरी चूत का तो में दीवाना हो गया। उसके चूत पे हल्के से बाल थे। मैने अपना मुंह उसकी चूत के पास लेकर गया ओर उसकी चूत पे एक किस दे दिया। अंजलि  यह देख कर हँसने लगी। उसकी चूत की गंध तो मुझे ओर उटेजित किए जा रही थी और फिर मैं उसके ऊपर लेट गया। उसके बाल उसके चेहरे पर फैले हुए थे। 

मैने उसके बालो को अपने हाथो से पीछे की ओर किया ओर एक हाथ से अपने लन्ड को उसकी चूत से सटा दिया। उसकी चूत पहले से कुछ ज्यादा गीली थी। मैं उसकी चूत को बाहर से लन्ड से सहलाने लगा। उसकी सांसे फूल रही थी। अब उसकी चूत का रस भी मेरे लन्ड पे लग गया। मैने बिना समय बर्बाद किए धीरे से उसकी चूत में लन्ड को धक्का देने लगा। 5 से 6 झटके देने के बाद मेरा लन्ड उसकी चूत में घुस गया। अंजलि की मुंह से चीख निकाल गई।

मैने तुरंत हाथ से उसके मुंह को बंद कर दिया। अंजलि को बहुत दर्द हो रहा था लेकिन वह दर्द को काफी हद तक सहन कर रही थी। मैने अंदर-बाहर करना जारी रखा और कुछ देर बाद अंजलि को अच्छा लगने लगा ओर चुदाई का मज़ा लेने लगी। करीब 5 मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

अंजलि की चूत ओर मेरा लन्ड खून से भरा हुआ था। मैने टावाल से खून को साफ कर लिया। अंजलि ने कहा "भैया मुझे बहुत मजा आया" ओर मुझे कसकर गले लगा लिया। फिर मैने उसे कहा "एक बार ओर करना चाहोगी" उसने मुस्कुराते हुए सर को हिलाया। 

मैं मम्मी-पापा के कमरे में देखकर अपने कमरे में आ गया। मेरी सेक्सी बहन बेड पर नंगी लेटी हुई थी। हम दोनों ही दूसरी चुदाई के लिए तैयार थे। रात की 3 बजे तक हम दोनों ने चुदाई का मजा लिया।अंजलि अब मेरे साथ बिल्कुल खुल गई। उसने कहा कि भैया मुझे बहुत नींद आ रही है। ओर उसने मुझे आखिर में लिप पे किस्स किया और अपने रूम में चली गई।


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13 comments:



  1. वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुला दे
    मुझे याद आनेवाले, कोई रास्ता बता दे

    रहने दे मुझको अपने कदमों की ख़ाक बनाकर
    जो नहीं तुझे गंवारा, मुझे ख़ाक में मिला दे

    मेरे दिलने तुझको चाहा, क्या यही मेरी खता है
    माना खता है लेकिन ऐसी तो न सजा दे

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  2. Best Bro-Sis Story.

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  3. Yaar bhai bahan ji chudai stort bahut mazedar hoti h

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